Thursday, October 29, 2009

दर्जनों समेटकर बैठा हूँ मै इन रंगीन दर्द के नजारों के साथ,
हाय वो तितली मेरे दिल को इस तरह से छू के चली गई

उन तमाम सूखे पत्तो को याद है उनके पाओकी नाजुकी मेहसूस,
पूछते है हर बार उनको पर क्या बताऊ कहा चली गई

मैखानो मैं शराबों का नशा कुछ खास छा नही रहा,
जाने कोनसा सुकून-ऐ-नशा इस बेक़सूर को आंखोंसे पिलाकर चली गई

दुनियासे, मौतसे और मैंने खुदसे इस तरह रंजिशे बनाई तुम्हारे लिए,
तक रहा हूँ तुम्हारे आने की ख़बर, तुम चले आओ जहा भी तुम चली गई...

Thursday, October 1, 2009

यु अकेले खिलके, मुरझाकर मरने में क्या मजा,
कोई खिले, मारके इस खिले फूलको तो मजा आए

बोहोत सुने देखे लोग आपके साए को तड़पते हुए,
कोई साया रात में चुपके से छू जाए तो मजा आए

नजाने कितने दिवाने केहते है दिल की बात हमसे,
कोई बिना अर्ज़ किए दिल चुराए तो मजा आए

मेरी हर एक साँस उनके ही नाम से जीती है,
किसीकी साँस हमारे नाम से जिए तो मजा आए

मरने से पहले हर दुश्मन आखरी सलाम देने आते है,
उसी वक्त हमारी नजर कोई दोस्त को ढूंढे तो मजा आए...